उदयपुर का विद्रोह

उदयपुर का विद्रोह

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सरगुजा राजपरिवार की एक शाखा उदयपुर में राज्य कर रही थी. यहाँ 1818 ई. में ब्रिटिश संरक्षण काल में कल्याण सिंह राजा थे. 1852 ई. में यहाँ के राजा और उसके भाई पर मानव हत्या का आरोप लगाकर अंग्रेजों ने कैद कर लिया तथा रियासत अपने अधिकार में ले लिया था. 1857 ई. के विद्रोह के समय उदयपुर के राजा अपने दोनों भाइयों के साथ उदयपुर पहुँचे.

1858 ई. में इन्होंने सैनिक संगठन के साथ विद्रोह किया और कुछ समय के लिए अपना राज्य स्थापित कर लिया, किन्तु सरगुजा राजा की सहायता से इनके दोनों राजकुमार भाइयों को 1859 ई. में गिरफ्तार कर आजन्म कालापानी का दण्ड देकर अण्डमान भेज दिया गया. उदयपुर की रियासत सरगुजा महाराज के भाई बिन्देश्वरी प्रसाद सिंहदेव को विद्रोह को दबाने में योगदान देने के उपलक्ष में अंग्रेजों ने 1860 ई. में दे दिया.


इस प्रकार छत्तीसगढ़ क्षेत्र में स्वतंत्रता के इस प्रथम महासमर को दबाने में अंग्रेज सफल हुए. इस महासमर में कई उपर्युक्त राजाओं, जमींदारों, सैनिकों तथा नागरिकों ने भाग लिया, किन्तु अन्य राजाओं एवं जमींदारों के सहयोग से इसे दबा दिया गया.

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