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कोरबा के पर्यटन स्थल [Tourist places of Korba]

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कोरबा नगर एक परिचय [Korba city an introduction]

दक्षिण-पूर्वी रेलवे के हावड़ा-मुम्बई मुख्य मार्ग पर रायगढ़ एवं बिलासपुर स्टेशन के बीच स्थित चांपा जंक्शन से मात्र 40 किमी की दूरी पर औद्योगिक नगरी ‘कोरबा’ स्थित है. बिलासपुर से इसकी दूरी 112 किमी है. यह नगर कोयला क्षेत्र में स्थित है एवं देश विदेश में विद्युत् उत्पादन हेतु प्रसिद्ध है. यह छत्तीसगढ़ की ‘ऊर्जा नगरी’ है.

Korba turism spot कोरबा के पर्यटन स्थल [Tourist places of Korba]

कोरबा सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन

कोरवा के समीप स्थित एन.टी.पी.सी. द्वारा स्थापित देश के सबसे बड़े विद्युत् गृह ने इस अंचल को सहज ही देश के ऊर्जा मानचित्र में एक महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया है. 2100 मेगावाट का कोरबा स्थित यह ताप विद्युत् गृह, नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन की विद्युत् परियोजनाओं की श्रृंखला की दूसरी कड़ी के साथ साथ सर्वाधिक महत्वाकांक्षी विद्युत् परियोजना भी है.

भारत एल्युमिनियम कम्पनी लिमिटेड (वाल्को)-

कोरवा के सार्वजनिक क्षेत्र में भारत एल्युमिनियम कम्पनी लिमिटेड का एक विशाल संयंत्र स्थापित है. 1500 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फैले इस संयंत्र की नींव 27 नवम्बर, 1965 को रखी गयी थी तथा उत्पादन 1975 में आरम्भ हुआ. वर्तमान में यह एक संयुक्त उपक्रम है, क्योंकि फरवरी 2001 को इसके 51% शेयर निजी भारतीय कम्पनी ‘स्टरलाइट’ को दे दिये गये हैं.

कोसगईगढ़ (पुरातात्विक)

औद्योगिक नगरी कोरबा से 25 किमी की दूरी पर ग्राम ‘छुरी’ से 9 किमी उत्तर-पूर्व स्थित ‘धनगाँव’ से 6 किमी की दूरी पर सघन वनों एवं पार्श्व में बहती हसदेव नदी के समीप समुद्र सतह से लगभग 400 फीट की ऊँचाई पर छत्तीसगढ़ के गढ़ों में से एक ‘कोसगईगढ़’ विद्यमान है. यह कुछ अवधि के लिए राजा वाहरेन्द्र (1480-1525 ई.) के समय कल्चुरियों की राजधानी रहा. यहाँ स्थित किला, गौमुखी, आदि प्रमुख स्थल हैं.

केन्दई जलप्रपात (प्राकृतिक)

बिलासपुर अम्बिकापुर मार्ग पर 132 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम केन्दई स्थित है.

दर्शनीय स्थल-पहाड़ियों तथा साल के घने वनों के मध्य स्थित ‘केन्दई’ ग्राम में एक पहाड़ी नदी लगभग 200 फुट की ऊँचाई से गिरकर एक खूबसूरत प्रपात बनाती है, जो केन्दई जल प्रपात’ के नाम से जाना जाता है. गर्मियों में ऊँचाई से गिरती दूध सी सफेद विशाल जलराशि और उस पर पड़ती सूर्य की किरणों से उत्पन्न इंद्रधनुषीय आभा यहाँ का मुख्य आकर्षण है.

तुम्माण (ऐतिहासिक, पुरातात्विक)-

बिलासपुर-अम्बिकापुर मार्ग पर कटघोरा से 10 किमी की दूरी पर पसान मार्ग पर ‘तुम्माण’ स्थित है. (हैह्यवंशी) राजाओं ने सर्वप्रथम अपनी राजधानी यहीं पर स्थापित की थी. यहाँ कल्चुरि शासक रत्नदेव प्रथम ने ‘शिव मंदिर का निर्माण कराया था. यह 11वीं शताब्दी का पंचस्थ प्रकार का पश्चिमोन्मुख मंदिर है. शिव मंदिर के अलावा यहाँ उत्खनन में प्राप्त महल एवं विभिन्न देवी देवताओं, नायक नायिकाओं की एवं मिथुन प्रतिमाएँ दर्शनीय हैं.

बांगो (जलाशय)

बिलासपुर अम्बिकापुर मार्ग पर लगभग 100 किमी की दूरी पर मुख्य मार्ग से दायीं ओर 10 किमी भीतर ‘बांगो’ स्थित है. यहाँ महानदी की सहायक नदी हसदो पर एक सुंदर बाँध बनाया गया है, जो ‘हसदेव-बांगो बहुउद्देशीय परियोजनांतर्गत’ ‘मिनीमाता जलाशय’ के नाम से जाना जाता है, साल वनों के मध्य स्थित होने के कारण जलाशय नैसर्गिक प्रतीत होता है. यहाँ 120 मेगावाट का जल विद्युत् गृह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जल विद्युत् गृह है.

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