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छत्तीसगढ़ में सोमवंश [Som Dynasty in Chhattisgarh]

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इस पोस्ट में हम छत्तीसगढ़ में सोमवंश के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे यदि कहीं पर आपको त्रुटिपूर्ण लगे तो कृपया पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स पर लिखकर हमें सूचित करने की कृपा करें

कांकेर का सोमवंश

कलचुरि शासक पृथ्वीदेव द्वितीय के राजिम शिलालेख से ज्ञात होता है कि उसके सेनापति जगपाल ने काकरय (वर्तमान कांकेर) क्षेत्र को विजित किया था. इसके पश्चात् यहाँ राज्य करने वाले राजाओं द्वारा कलचुरि संवत् का प्रयोग आरम्भ कर दिया गया. इस वंश के कुल पाँच अभिलेख प्राप्त हुए हैं.

इन अभिलेखों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि इस वंश का संस्थापक सिंहराज था. उसका उत्तराधिकारी वाघराज अथवा व्याघ्रराज हुआ. इसके पश्चात् वोपदेव राजा वना. वोपदेव के पश्चात् वह वंश तीन शाखाओं में विभाजित हो गया. पहली शाखा के विषय में कर्णराज के सिहावा अभिलेख (शक संवत् 1114 अर्थात् 1191 ई.) से जानकारी मिलती है, जिसमें उसे वोपदेव का पुत्र कहा गया है,

दूसरी शाखा के विषय में पम्पराज के तहनकापारा से प्राप्त कलचुरि संवत् 1214 ई. के ताम्रपत्र से जानकारी मिलती है. इससे ज्ञात होता है कि पम्पराज के पिता सोमराज, वोपदेव के पुत्र थे.

तीसरी शाखा के विषय में भानुदेव के शक संवत् 1242 अर्थात् 1320 के कांकेर शिलालेख से विवरण मिलता है. इससे ज्ञात होता है कि वोपदेव का पुत्र कृष्ण हुआ. कृष्ण के पश्चात् जैतराज हुआ. जैतराज कांकेर में राज्य करता था. इसका पुत्र सोमचन्द्र हुआ और सोमचन्द्र के पुत्र भानुदेव के समय में यह लेख उत्कीर्ण कराया गया. अनुमान किया जा सकता है कि सिंहराज (लगभग 1130 ईस्वी) से भानुदेव (1320 ईस्वी) तक कांकेर के क्षेत्र में सोमवंशी शासकों द्वारा राज्य किया गया.

का प्राचीन इतिहास Ancient History of Chhattisgarh छत्तीसगढ़ में सोमवंश [Som Dynasty in Chhattisgarh]
छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास

छत्तीसगढ़ में सोमवंश

  • सोम वंश का शासन छत्तीसगढ़ के कांकेर राज्य में 1125 ई. से 1344 ई. तक था।
  •  सिंहराज इस वंश के संस्थापक थे। कुछ इतिहास कार द्वारा माना जाता है की सोम वंश पाण्डु वंश की एक शाखा थी, जो कालांतर में सोमवंश के रूप में कांकेर में स्थापित हुई थी। 
  • शिवगुप्त इन राज्य वंश का पहला प्रतापी शासक था . उसके बाद जन्मेजय महाभवगुप्त प्रथम कोशल का राजा हुआ , जिससे इस राजवंश की प्रतिष्ठा बढ़ी उसने उडीसा को जीता और ” त्रिकलिंग का अधिपति ” कहलाया ।
  • दक्षिण के राजा राजेन्द्र चोल ने इस क्षेत्र पर आक्रमण क्र कोसल तथा उत्कल को अपने अधिपत्य में ले लिया बाद में परवर्ती सोमवंशी शासक महाशिव गुप्त में अपने राज्य क्षेत्र को पुनः प्राप्त किया । 11 वीं. सदी मे तुम्माण के कलचुरियों एवं उड़ीसा के शासक अनंतवर्मन चोडगंग द्वारा सोमवंश के शासकों को परास्त के उनके क्षेत्रों पर अधिकार क्र लिया गया ।

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