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पं. वामनराव लाखे

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पं. वामनराव लाखे

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय आंदोलन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. आप रायपुर जिले में सहकारिता के जनक थे तथा सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया.

इनका जन्म 17 सितंबर, 1872 को रायपुर 1904 में कानून की परीक्षा उत्तीर्ण कर वकालत प्रारंभ की. वे रायपुर नगरपालिका के दो बार अध्यक्ष भी रहे. इनके मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ मित्र’ का प्रकाशन पं. माधवराव सप्रे एवं श्री चिंचोलकर जी ने किया. गाँवों में जन-जागृति का कार्य भी इन्होंने किया. रायपुर कोआपरेटिव सेंट्रल बैंक की स्थापना उन्होंने सन् 1930 में की, जिसके वे 1913 से 1936 तक अवैतनिक सचिव तथा 1937 से 1948 तक अध्यक्ष रहे.

पं. वामनराव लाखे
पं. वामनराव लाखे

रायपुर होमरूल लीग की स्थापना जब 1915 में हुई, तब से इसके संस्थापक सदस्यों में से एक थे. 1916 में उन्हें राय साहब की उपाधि मिली थी. तहसील राजनीतिक परिषद् धमतरी के 1918 में वे अध्यक्ष थे. 1920 के असहयोग आंदोलनांतर्गत उन्होंने राय साहब की उपाधि त्याग दी जिससे जनता ने उन्हें ‘लोकप्रिय’ की उपाधि से विभूषित किया.

रायपुर में 1921 के विशाल खादी प्रदर्शन के आयोजन में लाखे जी का योगदान भी प्रमुख रहा. राष्ट्रीय विद्यालय के वे मंत्री भी रहे. 1922 में रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्वाचित किये गए. आरंग में 18 मई, 1930 को एक सभा में अंग्रेजी शासन के खिलाफ भाषण करने के अपराध में उन्हें 25 जून, 1930 को एक वर्ष की सजा व ₹ 3000 जुर्माना सुनाया गया. 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में सिमगा में सत्याग्रह करते हुये गिरफ्तार कर उन्हें चार माह की सजा पर नागपुर जेल भेजा गया. सन् 1945 में बलौदाबाजार में किसान कोऑपरेटिव राइस मिल की स्थापना की. 21 अगस्त, 1948 को उनका निधन हुआ.

वस्तुतः लाखे जी छत्तीसगढ़ में जन-जागृति के अद्वितीय प्रणेता थे.

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