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छत्तीसगढ़ की डाक व्यवस्था

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छत्तीसगढ़ की डाक व्यवस्था

अंग्रेजों ने भारत में आधुनिक डाक व्यवस्था का सूत्रपात किया. इस समय मार्ग की सुरक्षा और डाक परिवहन के लिए हरकारे और घोड़ों की व्यवस्था की गई. डाक मार्ग की व्यवस्था हेतु परगना एवं तहसील स्तर के अधिकारियों से सहयोग लिया जाता था. स्टाम्प जारी किए गए जिसमें रानी विक्टोरिया का चित्र अंकित था एवं कीमत एक आना थी. रायपुर में एक नया डाकघर खोला गया. व्यस्ततम् डाक मार्गों जैसे रायपुर-बिलासपुर-रतनपुर मार्ग पर अधिक हरकारे नियुक्त किये जाते थे.

1857 ई. में छत्तीसगढ़ की डाक व्यवस्था का पुनर्गठन किया गया जिसके अनुसार प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्तर की डाक लाइनें स्थापित की गयीं. अगस्त 1857 ई. में लेफ्टिनेन्ट स्मिथ को रायपुर डाकघर का पोस्टमास्टर नियुक्त किया गया. विद्रोहात्मक पत्रों की आवाजाही को रोका जाता था. 1861-62 ई. तक डाक व्यवस्था अनुकूल नहीं थी, पर मध्यप्रांत के गठन के पश्चात् इसमें प्रगतिशील सुधार हुए.

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