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छत्तीसगढ़ में सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाओं की नीति

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इस पोस्ट में हम छत्तीसगढ़ में सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाओं की नीति के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे यदि कहीं पर आपको त्रुटिपूर्ण लगे तो कृपया पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स पर लिखकर हमें सूचित करने की कृपा करें

छत्तीसगढ़ में सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाओं की नीति के उद्देश्य:-

सूचना प्रौद्योगिकी नीति  में अपने दृष्टिकोण को अमल में लाने के लिए व्यापक सूचना प्रौद्योगिकी अधोसंरचना तैयार करने पर प्रर्याप्त बल दिया गया है, यह, न केवल पहुँच बढ़ाने में मदद करेगी बल्कि यह सामाजिक विकास, त्वरित आर्थिक सुधार, दूरस्थ शिक्षा उपलब्ध कराने, शिक्षा के स्टार में सुचार और निवेश को आकर्षित करने में भी सहायक होगी, इस सूचना प्रौद्योगिकी नीति के प्रमुख उद्देश्य निम्नानुसार है

  1. “रोजगार चाहने वालों” की अपेक्षा “ रोजगार देने वाले” तैयार करना
  2. सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश के लिए छत्तीसगढ़ को अग्रणी गंतव्य के रूप में स्थापित करना|
  3. राज्य में ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार जो सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक हो|
  4. अंतिम व्यक्ति की आवश्यकता की पूर्ति हेतु अंतिम छोर तक की पंहुच बनाना|
  5. नागरिकों को सशक्त करना और सरकार उनका विश्वास बढ़ाना
  6. शासन तंत्र में सुधार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करना\
  7. भविष्य की सूचना प्रौद्योगिकी की आवश्यकता के लिए योजना निर्माण एंव निवेश
  8. इंटरनेट सुविधा को जन सामान्य तक पहुचना जिससे कि सूचना की पहुँच सुदृढ़ हो सके|
  9. ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना जिससे सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग गैर सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगों के विकास में भी हो सके|

 लक्ष्य :-

  • कभी भी, कहीं भी, कनेविक्टविटी सुनिश्चित करना जिससे सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का प्रतिस्पर्धा वातावरण बन सके, इस सोच से अतिरिक्त रोजगार पैदा होने के अलावा आय भी बढ़ेगी, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और अन्य क्षेत्रों में बेहतर सेवा मिलेगी|
  • पूरे राज्य में एकीकृत सेवा प्रदाय केन्द्रों की स्थापना करके सभी नागरिकों को वाजिब कीमत पर स्थानीय भाषा में सरकारी सेवाओं तक विस्तृत और आसान पंहुच की उपलब्धता|
  • सभी स्कूलों में चरणबद्ध रूप से सभी हाईस्कूलों और कॉलेजों में 100% सूचना प्रौद्योगिकी साक्षरता
  • चरणबद्ध रूप से स्कूलों में 6वीं से ऊपर की कक्षाओं में 100% सूचना प्रौद्योगिकी साक्षरता
  • उद्यमियों को आगे बढ़ाना, निवेश और रोजगार में वृद्धि करना तथा भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों में छत्तीसगढ़ राज्य का महत्वपूर्ण योगदान दर्ज करना|

कार्य योजना

प्रौद्योगिकी समर्थित शासन

राज्य शासन, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के बढ़ावा देने के शासन तंत्र के अंदर और बाहर बड़े पैमाने पर निवेश करने का लक्ष्य रखता है, ऐसा न सिर्फ सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की मांग बढ़ाने के लिए किया जायेगा, बल्कि सरकार के कामकाज में कार्यकुशलता और पारदर्शिता लाने के लिए भी किया जायेगा|

मददगार संस्थागत संरचना –चिप्स

राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी के विकास को गति देने और सम्पूर्ण सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए छत्तीसगढ़ एम्फोटेक एंड बायोटेक प्रोमोशन सोसाइटी चिप्स की स्थापना की गई है|

सूचना प्रौद्योगिकी के लाभ सभी को उपलब्ध कराने हेतु चिप्स द्वारा शीर्ष स्तर पर संस्थागत समन्वय किया जाता है, यह राज्य सरकार द्वारा निर्मित की गई एक पंजीकृत सोसाइटी है और एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है, यह संस्था राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी तथा बायोटेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने तथा इसमें गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री, चिप्स की उच्चधिकार प्राप्त शासी परिषद के प्रमुख हैं इस परिषद में शिक्षा/ज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के सुप्रसिद्ध लोगों के साथ-साथ भारत सरकार, राष्ट्रीय एजेंसियों तथा राज्य सरकार के प्रमुख विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं|

बेहतर सेवा प्रदान कराने की क्षमता के लिए विभागीय कम्प्युटरीकरण

विभागों में कम्प्युटरीकरण  का काम पूरा कराने के लिए प्रत्येक विभाग में एक सूचना प्रौद्योगिकी कार्यदल, एक मुख्य सूचना अधिकारी (सीओओ) तथा चिप्स का एक प्रतिनिधि होगा, अन्य विभागों अथवा एजेंसियों से सूचना प्रौद्योगिकी व्यवसायी को स्वेच्छा से अथवा संविदा आधार पर भी सदस्य के रूप में नामांकित किया जा सकेगा, प्रत्येक विभाग में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े मामलों के लिए एक नोडल अधिकारी भी होगा, विभागों के कम्प्युटरीकरण में खास जोर यह सुनिश्चित करने पर होगा कि कम्प्युटरीकरण में निवेश सरकारी विभागों की सेवा देने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए हो, इस सिलसिले में सरकार एकीकृत सरकारी सेवा डिलीवरी पोर्टल बनाएगी और जो सभी सरकारी सेवाएं एक पते पर मुहैया कराएगी एक साझा डिलीवरी पोर्टल बनाकर सरकार विभिन्न विभागीय अनुप्रयोगों के बीच संचालन की व्यवस्था से सम्बन्धित मुद्दों को प्रभावी ढंग से निपटाना चाहती है|

सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सूचना प्रौद्योगिकी प्रस्तावों में प्रत्येक निवेश से पहले प्रचलित और लक्षित सेवा स्तर के एक स्पष्ट परिभाषा तय हो, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सूचना प्रौद्योगिकी पहल की मुख्य धुरी “नागरिक” ही रहे|

शासकीय प्रक्रिया में नवीनता किसी भी स्व-चलित प्रक्रिया का बुनियादी आधार है, प्रदर्शन के अहम क्षेत्रों में जिसमें कि लागत, गुणवत्ता, सेवा और सम्मिलित है, महत्वपूर्ण सुधार प्राप्त करना आवश्यक है प्रत्येक विभागीय पहल के मामले में यह आवश्यक होगा कि प्रचलित प्रक्रिया में नवीनता लाने के प्रस्ताव को स्पष्ट बताया जाए|

इस दिशा में सरकार द्वारा की गई कुछ प्रमुख पहलों का उल्लेख नीचे किया गया है-

i. छत्तीसगढ़ ऑनलाइन इंफोर्मेशन फॉर सिटीजन इम्पावरमेंट 

यह परियोजना लागू होने की स्थिति में है, यह नागरिकों की सभी आवश्यकताओं के लिए कभी भी, कहीं भी आधार पर सुरक्षित सेवाओं के लिए ‘एकल खिड़की निदान’ उपलब्ध कराती है| चॉइस नागरिकों को सरकारी कार्यालयों से पूरी सहूलियत के साथ सेवाएं प्राप्त करने के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करती है, चॉइस सेवा केन्द्रों से विविध नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें ई-गवर्नेन्स ई-कामर्स इत्यादि शामिल हैं, इस परियोजना में नागरिकों और सरकार के बीच परस्पर सम्पर्क की सम्पूर्ण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी|

ii.  भौगोलिक सूचना प्रणाली

राज्य शासन ने 37 लेयर्स वाली बहुत ही व्यापक भौगोलिक सूचना प्रणाली का विकास किया है, सैटेलाइट डाटा का उपयोग कर प्राकृतिक संसाधनों को नक्शाबद्ध (नेचुरल रिसोर्स मेपिंग) करने का कार्य 1:50,000 मापमान में सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्रोसेसिंग के आधार पर किया गया है, विशेष डाटा अधोसंरचना में प्राकृतिक के नक्शे, डिजिटल डाटाबेस, नेचुरल रिसोर्स असेसमेंट एंड मैनेजमेंट एवं इस आधार पर विभिन्न बिभागों के लिए एक ‘निर्णय सहायता प्रणाली’ विकसित की गई है, भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग राज्य के विकास की दीर्घकालीन योजनाओं के लिए किया जायेगा|

iii. ई-ग्राम सुराज-

पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के लिए विशेष तौर पर उपयोगी ‘सिम्प्यूटर’ का वितरण कुछ विकासखंडों के सरपंचों को किया जा रहा है, हाथ में रखा जा सकने वाला यह उपकरण पूरी तरह स्वदेशी है, ग्रामीण स्तर पर जनता के प्रतिनिधि ‘सरपंच’ सिम्प्यूटर के माध्यम से राज्य पर उपलब्ध डाटाबेस का लाभ विभिन्न क्षेत्रों जैसे ज्ञान, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग, राज्य शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन, अपनी तथा पंचायत की कार्यदक्षता में सुधार आदि कार्यों में ले सकेंगे|

iv. भुइयां’ (भू-अभिलेख प्रणाली) –

राज्य में भू-अभिलेखों के कम्प्युटरीकरण और इनके वितरण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है वर्तमान में बी-1 और खसरे से सम्बन्धित विवरण, तहसील स्तर पर स्व-चलित प्रणाली में उपलब्ध है और शीघ्र ही इसका विस्तार विकासखंड स्तर पर हो जायेगा, राज्य में दूर-दराज के स्थानों से नामांतरण को शामिल करने के लिए यथोचित सूचना प्रौद्योगिकी समाधान का विकास किया जा रहा है निकट भविष्य में  कम्प्युटरीकृत नक्शों का वितरण भी इन केन्द्रों से करने हेतु राज्य सरकार संकल्पबद्ध है|

v. ज्ञान विनिमय और ई-कक्षा –

छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहाँ शासकीय इंजीनियरिंग कॉलोजों के लिए अत्याधुनिक वर्चुअल क्लासरूम बनाये गए हैं| रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज को आईआईटी कानपुर से जोड़ने की सुविधा स्थापित की जा चुकी है| इस सुविधा का विस्तार निजी क्षेत्र की संस्थाओं में भी किया जायेगा| छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग कॉलेजों को सिमित संसाधनों में उन्नत करने तथा यहाँ के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराने में ई-कक्षा का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है|

vi. स्थानीय भाषा में कार्य के स्तर में सुधार-

राज्य सरकार, स्थानीय भाषा में कार्य के मानदंडों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है| इस प्रयोजन के लिए राज्य शासन शोध एवं विकास हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु तत्पर है|

vii. स्मार्ट कार्ड-

छत्तीसगढ़ राज्य के परिवहन विभाग द्वारा स्मार्ट कार्ड आधारित परिवहन पंजीकरण और ड्राइविंग लायसेंस प्रणाली लागू करने में चिप्स द्वारा सम्पूर्ण प्रौद्योगिकी मदद उपलब्ध कराई जा रही है| निर्माण-स्वामित्व-संचालन हस्तांतरण (बूट) मॉडल पर आधारित स्मार्ट कार्ड परिवहन प्रबंध सूचना प्रणाली की निविदा शीघ्र जारी की जाएगी, तत्पश्चात पंजीकरण पुस्तकों और वर्तमान नौ कार्यालयों के लाइसेंसों को डिजिटल स्वरुप दिया जायेगा|

viii. स्वान (स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क) –

इस परियोजना के तहत राज्य की संचार अधोसंरचना के लिए अंतविभागीय संचार और डाटा को साझा करने की योजना बनाई गई है, राज्य में इस समय ई-पंचायत नामक एक कार्यक्रम के तहत वी सेट के जरिये डाटा और वीडियो संचार समेत विकासखंड स्तर तक ले लिए कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है| राज्य शासन ग्राम स्तर तक उच्च स्तरीय बैंडविड्थ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है|

ix. ई-प्रोक्योरमेंट-

राज्य शासन के सभी विभागों में सम्पूर्ण क्रय प्रक्रिया को स्व-चलित करने हेतु ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू करने हेतु प्रोत्साहन दिया जा रहा है, राज्य के पांच विभागों यथा छत्तीसगढ़ राज्य अधोसंरचना विकास निगम (सीएसआईडीसी) स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य बिजली बोर्ड (सीएसईबी) में ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली को लागू करने का कार्य इस समय प्रथम चरण में है, आशा है कि इसे लागू करने से निविदा प्रक्रिया में तेजी एवं पारदर्शिता आयेगी| जवाबदेही का बेहतर निर्धारण हो सकेगा और सरकार के आवर्ती व्यय में कमी आएगी|

x. ग्राउंडवाटर मॉडलिंग सिस्टम एंड वाटरशेड मॉडलिंग सिस्टम-

भूमिगत जल के अनुरूपण के प्रत्येक चरण के लिए ग्राउंडवाटर मॉडलिंग सिस्टम (जीएमएस) वाटरशेड मॉडलिंग सिस्टम(डब्लूएमएस) साधन उपलब्ध कराता है इसमें स्थल का वर्गीकरण, मॉडल विकास, पोस्ट प्रोसेसिंग, कैलिब्रेशन और विजुअलाइजेशन शामिल है|

xi. छत्तीसगढ़ के कोषालयों का ऑनलाइन कम्प्युटरीकरण –

राज्य के सभी कार्यालयों एवं उप कोषालयों को एक वाइड एरिया नेटवर्क के तहत जोड़ने के लिए ई-कोष परियोजना पर काम चल रहा है| इसके बाद कोषालयों का काम-काज ऑनलाइन हो जायेगा और इससे नगद राशि ( तरलता) प्रबंधन में सुधार आएगा और एक उच्च स्तरीय राज्यव्यापी नेटवर्क तैयार होगा, जिससे दैनिक आधार और बजट नियंत्रण सम्भव होगा, इससे शासन के व्ययभार में कमी आएगी|

xii.छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर विभाग के लिए सूचना प्रणाली-

वाणिज्यिक कर विभाग में राजस्व वसूली के बेहतर प्रबंधन और बजटीय नियंत्रण के लिए के व्यापक प्रबंधन सूचना प्रणाली का विकास किया गया है| इस प्रणाली में राज्य के विभिन्न कार्यालयों के बीच नेटवर्किंग और केद्रीयकृत प्रबंधन वाले डाटा सेंटर के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली शामिल है, इससे विभाग की कार्य पद्धति में गति और सुदृढ़ता आएगी|

xiii. वीडियो कांफ्रेसिंग-

राज्य के सभी 16 जिलों एवं राज्य मंत्रालय को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जोड़ दिया गया है| इस नेटवर्क से राज्य की राजधानी को आवासीय आयुक्त कार्यालय नई दिल्ली से भी सम्बद्ध कर दिया गया है| इस प्रणाली का उपयोग जन-सामान्य की समस्याओं से रूबरू होने, उनका त्वरित निराकरण करने तथा शासकीय विभागों के द्वारा जिलों से समन्यव स्थापित करने में किया जाता है इस प्रणाली का अधिकाधिक एंव युक्तियुक्त उपयोग सुनिश्चित किया जायेगा|

xiv. टेलीमेडिसिन-

एक व्यापक टेलीमेडिसिन नेटवर्क बनाया जायेगा, जो राज्यव्यापी एरिया नेटवर्क पर भी सफलता से कार्य कर सकेगा| स्टेट टेलीमेडिसिन नेट का उद्देश्य राज्य के नागरिकों से तत्काल चिकित्सा सलाह और सुविधाएँ उपलब्ध कराना होगा, इस सेवा का विस्तार दूर-दराज, आदिवासी तथा पिछड़े क्षेत्रों तक होगा|

xv. राज्य की क्षमता बढ़ाने के लिए मिशन सोच-

सरकार में सूचना प्रोद्योगिकी प्रारंभ करने का एक उद्देश्य यह भी है कि राज्य के स्थापना व्यय में कमी आये| सभी सरकारी कर्मचारियों को कम्प्युटर पर काम करने योग्य बनाने के लिए प्रोत्साहन देने वाली एक योजना प्रारंभ की जाएगी| इसके अलावा हार्डवेयर की आपूर्ति हेतु किये जाने वाले अनुबंध में एक आवश्यक शर्त रखी जा रही है कि प्रदायकर्ता, कर्मचारियों को इस हार्डवेयर पर कार्य करने का प्रशिक्षण प्रदान करेगा| एनआईएसजी ( नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्मार्ट गवर्नेस) और अन्य अग्रणी संस्थाओं की पहचान, ऐसे संगठनों के रूप में की गई है जो ‘प्रशिक्षक को प्रशिक्षण’ देंगे इससे ई-शासन की पहल के लिए राज्य में स्वयं के मानव संसाधन तैयार होंगे जो कि शासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस विधा में दक्ष करेंगे| राज्य के क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है| इस रणनीति के एक हिस्से के रूप में क्षमता विकास की पहल प्रशासनिक मशीनरी के सबसे ऊपरी हिस्से अर्थात् राजनैतिक कार्यपालिकों से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कमर्चारियों तक की जा रही है| एक अत्यंत महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजनैतिक कार्यपालिका सहित सम्पूर्ण सरकारी मशीनरी, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के अधिकारियों/कर्मचारियों को कम्प्युटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है|

महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ई-कक्षा बनाई गई है, स्कूली बच्चों के लाभ के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रम लागू किया जायेगा, जिसकी तयारी अंतिम चरणों में है, इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिले में ‘उत्कृष्टता केंद्र’ बनाये जायेंगे, यह केंद्र स्कूली बच्चों को सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा देने के लिए 60 सीट वाली अनूठी प्रयोगशाला बनेगें|

फोकस ऑन कन्टेन्ट (सामग्री पर ध्यान)

सूचना एंव संचार प्रौद्योगिकी में निवेश का लाभ सभी नागरिकों को प्रदान करने हेतु राज्य में ऐसा सकारात्मक वातावरण बनाया जायेगा, जिसमें प्रत्येक नागरिक प्रौद्योगिकी समर्थित साधनों के जरिए सूचनाएं हिंदी में भी उपलब्ध कराई जाएँगी, इससे सूचना प्रौद्योगिकी के लिए उत्तर भारत के बाजारों में छत्तीसगढ़, हिंदी भाषा के पठनीय एवं उच्च स्तरीय सामग्री का विकास करने वाल्व अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा, नागरिक सेवाओं, यथा-वाहन पंजीयन, भू-अभिलेख, जन्म एवं मृत्यु पंजीयन, रोजगार सम्बन्धी सेवाओं, एक्साईज शुल्क का भुगतान, विक्रय कर एवं स्थानीय कर आदि की जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध होगी|

एकीकृत सेवा प्रदान की व्यवस्था

डिजिटल अंतर की समस्या हल करने वाली एक एक प्रभावी सेवा प्रणाली डिजायन करने और उसे लागू करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी| एक किफायती और एकीकृत सेवा मॉडल का विकास किया जायेगा| ‘सामान्य सेवा केंद्र’ की स्थापना की जाएगी| जिसके लिए आवश्यक कोष प्रदान कर इसका प्रबंधन किया जायेगा| इसमें सामुदायिक भागीदारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी और सरकार का प्रत्यक्ष समर्थन सम्मिलित होगा| सूचना तक पंहुंच, सूचना प्राप्त करने के साधन के स्वामित्व से ज्यादा महत्वपूर्ण है| प्रत्येक गाँव में मौके की जगह पर स्थित ‘सामान्य सेवा केंद्र’ सुनिश्चित करेंगे कि सुदूर क्षेत्रों को इस सुविधा से जोड़ा जा सके|

  1. शोध, विकास एवं ओपन सोर्स/फ्री –सॉफ्टवेयर का उपयोग
  2. राज्य शासन की मान्यता है कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मालिकाना हक एंव उपयोग पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए| अतः राज्य में  ओपन सोर्स/फ्री –सॉफ्टवेयर को बढ़ावा दिया जायेगा| पूर्व से उपलब्ध स्वामित्व वाले सॉफ्टवेयर में अनुप्रयोग की गुणवत्ता को विकसित किया जायेगा| प्रयास किया जायेगा कि गुणवत्ता से समझौता न करते हुए सूचना प्रोद्योगिकी के खर्च में कमी हो शासन ओपन सोर्स/फ्री –सॉफ्टवेयर में अनुसंधान एंव विकास  की सुविधा सभी क्षेत्रों में विकसित करेगा, जिससे वास्तव में सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित समाज विकसित हो|

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