छत्तीसगढ़ की राजस्व व्यवस्था

छत्तीसगढ़ की राजस्व व्यवस्था रायपुर के डिप्टी कमिश्नर मि. इलियट ने छत्तीसगढ़ की राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए गवर्नर जनरल के निर्देशानुसार 'तीन वर्षीय राजस्व व्यवस्था लागू की, जो सन् 1855 से 1857 तक के लिए बनी थी. यह क्षेत्र
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छत्तीसगढ़ संभाग का गठन

छत्तीसगढ़ संभाग का गठन 1861 में मध्य प्रांत के गठन के समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र के प्रशासन को चीफ कमिश्नर के अधीन रखा गया. सन् 1862 ई. में छत्तीसगढ़ को स्वतंत्र संभाग का दर्जा दिया गया जिसका मुख्यालय रायपुर बनाया गया.इस समय संबलपुर को मध्य
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छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन

छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन नागपुर राज्य के अंग्रेजी साम्राज्य में विलय के साथ ही छत्तीसगढ़ प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश शासन का अंग बन गया. यद्यपि बिलय की घोषणा 13 मार्च, 1854 को की गई थी तथापि 1 फरवरी, 1855 को छत्तीसगढ़ के अन्तिम मराठा
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मध्य प्रांत का गठन

मध्य प्रांत का गठन प्रशासनिक सुविधा के दृष्टिगत 2 नवम्बर, 1861 ई. को नागपुर और उसके अधीनस्थ क्षेत्रों को मिलाकर एक केन्द्रीय क्षेत्र का गठन किया गया, जिसे 'मध्य प्रांत' का नाम दिया गया जिसका संगठन अग्रानुसार था- (1) नागपुर राज्य के
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छत्तीसगढ़ में तहसीलदारी व्यवस्था का आरम्भ

छत्तीसगढ़ में तहसीलदारी व्यवस्था का आरम्भ छत्तीसगढ़ में डिप्टी कमिश्नर ने प्रथम प्रशासकीय परिवर्तन के रूप में यहाँ तहसीलदारी- व्यवस्था का सूत्रपात किया. छत्तीसगढ़ जिले में तीन तहसीलों का निर्माण किया गया रायपुर, धमतरी और रतनपुर.
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छत्तीसगढ़ के लोकगीत

छत्तीसगढ़ के लोकगीत लोकगीत, लोक जीवन की अलिखित, व्यवहारिक रचनाएँ हैं, जो लोक परम्परा से प्रचलित और प्रतिष्ठित होती हैं. लोक गीतों के रचयिता प्रायः अज्ञात होते हैं. वस्तुतः ये गीत समूहगत रचनाशीलता का परिणाम होते हैं एवं मौखिक परम्परा में
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छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य

छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य बोलियों की वाचिक परम्परा पर निर्भर है. वस्तुतः लोक साहित्य दो तरह के माने जा सकते हैं- (1) वाचिक यानी मौखिक साहित्य- वाचिक परम्परा में लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा, गीतकथा, लोकमिथ कथा, लोक
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छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के कलाकार

छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति छत्तीसगढ़ व्यापक रूप से गाँवों, कस्बों का प्रदेश है. यहाँ की संस्कृति को लोक संस्कृति के रूप में देखना ही अधिक सार्थक है. छत्तीसगढ़ की संस्कृति 'लोक' की संस्कृति है, जो जनजातीय भू भागों में अपनी पृथक् सांस्कृतिक
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दण्डकारण्य का पठार [plateau of dandakaranya]

दण्डकारण्य का पठार स्थिति छत्तीसगढ़ के मैदान के दक्षिण में बस्तर का पठार है जो पूर्व में ओडिशा के पठारी भाग से जुड़ा हुआ है. छत्तीसगढ़ के कड़प्पा बेसिन के दक्षिण में आद्यमहाकल्प युग की ग्रेनाइट तथा नीस का एक विस्तृत प्रदेश
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महानदी बेसिन [Mahanadi Basin]

महानदी बेसिन स्थिति यह प्रदेश के लगभग मध्य भाग में अवस्थित है तथा महानदी के ऊपरी अपवाह क्षेत्र में पड़ता है. इसके अन्तर्गत राजनांदगाँव (मोहला तहसील के दक्षिणी हिस्से को छोड़कर), कवर्धा, दुर्ग, रायपुर, धमतरी, महासमुंद, बिलासपुर,
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