छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधन

छत्तीसगढ़ में खनिज छत्तीसगढ़ के भू गर्भ में विभिन्न प्रकार के खनिज जैसे लोहा, बॉक्साइट, कोयला, डोलोमाइट, चूना पत्थर, अभ्रक, सोना, कोरंडम, किम्बरलाइट, सीसा आदि प्रचुरता में हैं. अंग्रेजों ने इसका सर्वेक्षण आदि का कार्य अपने काल में
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छत्तीसगढ़ में वाणिज्य एवं उद्योग

छत्तीसगढ़ में वाणिज्य एवं उद्योग तत्कालीन समय में भारत एक कृषि प्रधान देश था, जबकि इंगलैण्ड मूलतः व्यापार प्रधान. अपने व्यापार के बल पर ही उसने दुनिया के एक विस्तृत भू भाग में अपने उपनिवेश स्थापित कर लिए थे. भारत भी आलोच्य काल में
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छत्तीसगढ़ में कृषि व सिचाई

छत्तीसगढ़ में कृषि व सिचाई छत्तीसगढ़ में कृषि ब्रिटिश पूर्व काल में मराठों द्वारा कृषि की उन्नति हेतु कोई प्रयास नहीं किये गये. यहाँ कृषि कार्य परम्परागत पद्धति से होता था. प्रदेश की कर व्यवस्था त्रासदकारी थी, जबकि अधिकांश लोगों की
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छत्तीसगढ़ में रेल यातायात

छत्तीसगढ़ में रेल यातायात छत्तीसगढ़ में रेल लाइन निर्माण का कार्य 19वीं शताब्दी के अंत में आरम्भ हुआ. अंग्रेजों ने नागपुर- छत्तीसगढ़ रेलवे के नाम से लाइनें बिछाने का कार्य आरम्भ किया. इसको मुख्यतः व्यापारिक सुविधा एवं लाभ तथा अकाल
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मराठा काल में छत्तीसगढ़ की यातायात व्यवस्था

मराठा काल में छत्तीसगढ़ की यातायात व्यवस्था यातायात मराठा एवं पूर्व काल में यातायात की स्थिति अत्यन्त दयनीय थी. अंचल के प्रमुख स्थलों को जोड़ने हेतु मार्ग नहीं थे, जो सड़कें थीं उनका रखरखाव नहीं होता था. साथ ही मार्ग सुरक्षित नहीं थे.
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छत्तीसगढ़ में विनिमय

छत्तीसगढ़ में विनिमय मराठा काल में छत्तीसगढ़ में नागपुरी रुपए का चलन था, किन्तु अंग्रेजों ने 5 जून, 1855 से इसका चलन बन्द कर दिया एवं कम्पनी के रुपए को कानूनी तौर पर यहाँ लागू किया. इस समय नागपुरी रुपया कम्पनी के सौ रुपए के बराबर माना
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छत्तीसगढ़ की डाक व्यवस्था

छत्तीसगढ़ की डाक व्यवस्था अंग्रेजों ने भारत में आधुनिक डाक व्यवस्था का सूत्रपात किया. इस समय मार्ग की सुरक्षा और डाक परिवहन के लिए हरकारे और घोड़ों की व्यवस्था की गई. डाक मार्ग की व्यवस्था हेतु परगना एवं तहसील स्तर के अधिकारियों से
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छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था

छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था मराठा काल में छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था का कोई विशेष प्रवन्ध न था. 1855 ई. में यहाँ केवल 149 कर्मचारी कार्यरत् थे जिनका वितरण भी यहाँ असमान था. सितम्बर 1856 में नई व्यवस्था लागू की गई जिससे यहाँ के पुलिस
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छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था

छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था मराठा शासन के अन्तर्गत न्याय के निर्वहन हेतु न तो निश्चित नियम थे न ही निश्चित अदालतें थी. छत्तीसगढ़ क्षेत्र के ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत आने के पश्चात् यहाँ के लिए नवीन न्याय व्यवस्था का सृजन किया गया
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छत्तीसगढ़ में ताहूतदारी पद्धति

छत्तीसगढ़ में ताहूतदारी पद्धति छत्तीसगढ़ में ताहूतदारी पद्धति का सूत्रपात केप्टन सेन्डीस (1825-28 ई.) के अधीक्षण काल में हुआ. उन्होंने लोरमी और तरेंगा नामक ताहूतदारी का निर्माण किया. सिरपुर और लवन नामक दो ताहूतदारी का निर्माण मराठा काल
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