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छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला शासिका महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी

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प्रफुल्ल कुमारी देवी का राज्याभिषेक सन् 1922 में 12 वर्ष की आयु में हुआ था. उनका विवाह मयूर भंज महाराज के भतीजे प्रफुल्ल चन्द्र भंजदेव के साथ जनवरी 1927 को हुआ. ‘द इण्डियन वूमन हुड’ नामक एक पत्रिका में महारानी के विषय में उल्लेख है.

छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला शासिका महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी

महारानी ने महिला के रूप में अपने अधिकारों की सम्पूर्ण प्रभुसत्ता को प्राप्त कर एक इतिहास बनाया, जबकि उनके पिता (रुद्रप्रतापदेव) ने मृत्यु के कुछ समय पूर्व एक दत्तक पुत्र लेने की इच्छा व्यक्त कर अपनी पत्नी (महारानी सौतेली माँ) को अधिकृत किया था.

महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी के दो पुत्र और दो पुत्रियाँ थीं. उनमें पुत्री कमला देवी सबसे बड़ी थी. महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी को अंग्रेज शासकों ने लगातार तंग किया था. उनके पति प्रफुल्ल चन्द्र भंजदेव के बस्तर प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा दिया था, क्योंकि उन्होंने बस्तर को 1930 ई. में निजामिस्तान बनाने के ब्रिटिश षड्यन्त्र की खिलाफत की थी. उन्हें उनके बच्चों से दूर रखा गया तथा उनका अपने बच्चों पर कोई अधिकार नहीं रह गया था. उन्हें भी अंग्रेजों ने प्रताड़ित किया. महारानी को अपेंडीसायटिस’ के ऑपरेशन के लिये लंदन भेजा गया था, जहाँ उनका देहावसान 1936 को संदेहास्पद ढंग से हो गया. सम्भवतः उन्हें अंग्रेज शासकों द्वारा षड्यन्त्रपूर्वक मार दिया गया.

इस प्रकार महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी केवल बस्तर की ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ की प्रथम एवं एक मात्र महिला शासिका थी. इसके बाद प्रवीरचन्द्र भंजदेव को ब्रिटिश शासन ने औपचारिक रूप से गद्दी पर बिठाया एवं रियासती शासन की बागडोर अपने हाथ में ले ली.

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