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कोटपाड़ सन्धि (6 अप्रैल, 1778 ई.)

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कोटपाड़ सन्धि (6 अप्रैल, 1778 ई.) :

बस्तर भोसला शासन के अधीन सन्धि के अवसर पर भोंसला पक्ष, जैपुर पक्ष तथा बस्तर राज्य के लोग उपस्थित थे. नागपुर के भोंसलों के अधीन रतनपुर के भोंसला राजा बिम्बाजी (1758-1787 ई.) की ओर से त्र्यम्बक अवीरराव उपस्थित था. भोंसलों ने चूँकि बस्तर राज्य की सैन्य सहायता की थी, अतएव दरियावदेव ने भोंसलों की अधीनता स्वीकार कर ली. इसके अतिरिक्त उसे भोंसला राजा को प्रतिवर्ष ₹ 59,000 टकोली या नजराना देने के प्रतिज्ञापत्र पर भी हस्ताक्षर करना पड़ा. इसके साथ भोंसला शासन ने यह वचन दिया था कि यदि वस्तर राज्य नियमित रूप
से टकोली पटाते हैं, तो भोंसला शासन उन पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करेगा तथा वे अपने राज्य के पूर्ण अधिकारी होंगे.

सन्धि के अन्तर्गत कोटपाड़ परगना जैपुर राज्य को प्राप्त हुआ. जैपुर पूर्व में ही ब्रिटिश अधीनता में जा चुका था.


दरियावदेव द्वारा सन्धि पत्र पर 6 अप्रैल, 1778 ई. को हस्ताक्षर कर देने से बस्तर नागपुर के अधीन रतनपुर राज्य के अन्तर्गत चला गया और इसी समय से बस्तर छत्तीसगढ़ का अंग बना.

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