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रायपुर नगर का परिचय [Introduction to Raipur city]

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रायपुर नगर एक परिचय

चौदहवीं सदी के अंतिम चरण में रतनपुर के कल्चुरी राज्य से एक शाखा अलग हो गई एवं उसने रायपुर को अपनी राजधानी बनाया. वर्तमान रायपुर का अभ्युदय खारून नदी के तट पर स्थित रायपुरा ग्राम से होता है. यह स्थल आज पुरानी बस्ती के नाम से जाना जाता है, कल्चुरी वंश के रतनपुर के राजा राय ब्रह्मदेव इस अंचल में सन् 1401 में प्रविष्ट हुये तथा रायपुरा ग्राम को प्रशा हेतु उपयुक्त समझ कर उसे राजधानी का रूप दिया एवं नगर बसाया. रायपुर की ऐतिहासिकता देखी जाये, तो उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार नगर का वर्तमान भूखंड 5वीं शताब्दी में पाण्डुवंश के आधिपत्य में रहा, फिर लगभग 700 वर्षों का दीर्घ शासन कल्चुरियों का रहा.

1741 ई. के मराठा आक्रमण के पश्चात् यह क्षेत्र हैह्यवंशियों के हाथों से निकालकर मराठों के आधिपत्य में चला गया लगभग 80 वर्ष पश्चात् 1818 के तृतीय आंग्ल- मराठा युद्ध और मराठों की पराजय से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ अंग्रेजों के नियंत्रण में चला गया, जो 1830 तक चला. पुनः 1831 से 1854 तक मराठे रहे और अन्ततः 1854 ईसवी में यहाँ अंग्रेजों का आधिपत्य स्थापित हुआ, जो 1947 तक चला. 1818 में अंग्रेज कर्नल एगेन्यू, जोकि ब्रिटिश नियंत्रण काल में छत्तीसगढ़ के द्वितीय प्रशासक (1818-25) ईसवी हुये (प्रथम कैप्टन एडमन्ड अल्पकालीन घे) ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रतनपुर से रायपुर स्थानांतरित की.

1861 में मध्यप्रांत के गठन के पश्चात् 1862 ईसवी में छत्तीसगढ़ एक पृथक् संभाग बना जिसका मुख्यालय रायपुर बना. रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 06 (मुम्बई-कोलकाता मार्ग) पर स्थित छत्तीसगढ़ की राजधानी है साथ ही यह प्रदेश का प्रमुख व्यवसायिक एवं औद्योगिक केन्द्र भी है एवं देश के सभी भागों से सड़क रेल एवं वायु मार्ग से जुड़ा हुआ है,

इतिहास


ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से रायपुर जिले में महत्वपूर्ण है यह ज़िला एक बार दक्षिणी कोशल का हिस्सा था और इसे मौर्य साम्राज्य के तहत माना जाता था। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक किलों को लंबे समय तक नियंत्रित करने के लिए रायपुर शहर, हैहाया किंग्स की राजधानी थी। 9 वीं सदी के बाद से रायपुर शहर का अस्तित्व रहा है, शहर की पुरानी साइट और किले के खंडहर शहर के दक्षिणी भाग में देखे जा सकते हैं। सतवाहन किंग्स ने 2 री और 3 री शताब्दी तक इस हिस्से पर शासन किया।

चौथी शताब्दी ईस्वी में राजा समुद्रगुप्त ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और पांचवीं छठी सेंचुरी ईस्वी तक अपने प्रभुत्व की स्थापना की थी जब यह हिस्सा सरभपुरी किंग के शासन के अधीन आया था। पांचवीं शताब्दी में कुछ अवधि के लिए, नाला राजाओं ने इस क्षेत्र का वर्चस्व किया। बाद में सोमनवानी राजाओं ने इस क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया और सिरपुर (श्रीपुर-द सिटी ऑफ वेल्थ) के साथ उनकी राजधानी शहर के रूप में शासन किया। महाशिवगुप्त बलराजुण इस वंश के सबसे शक्तिशाली सम्राट थे। उनकी मां, सोमवंश के हर्ष गुप्ता की विधवा रानी, ​​रानी वसता ने लक्ष्मण के प्रसिद्ध ईंट मंदिर का निर्माण किया।

Raipur-district
Raipur-district

तुमान के कलचुरी राजा ने इस हिस्से को एक लंबे समय के लिए रतनपुर को राजधानी बना दिया। रतनपुर, राजिम और खल्लारी के पुराने शिलालेख कालचिरि राजाओं के शासनकाल का उल्लेख करते हैं। यह माना जाता है कि इस वंश के राजा रामचंद्र ने रायपुर शहर का निर्माण किया और बाद में इसे अपने राज्य की राजधानी बना दिया।

रायपुर के बारे में एक और कहानी है कि राजा रामचंद्र के पुत्र ब्रह्मदेव राय ने रायपुर की स्थापना की थी। उनकी राजधानी खलवतिका (अब खल्लारी) थी। नव निर्मित शहर का नाम ब्रह्मदेव राय के नाम पर ‘रायपुर’ रखा गया था। यह अपने समय के दौरान 1402 ए.डी. में हुआ था। हजराज नायक, हकेश्वर महादेव का मंदिर,
खारुन नदी के किनारे का निर्माण किया गया था। इस राजवंश के शासन की कमी ने राजा अमरसिंह देव की मृत्यु के साथ आया था। अमरसिंघे की मौत के बाद यह क्षेत्र भोसले राजाओं का क्षेत्र बन गया था। रघुजी तृतीय की मृत्यु के साथ, क्षेत्र ब्रिटिश सरकार ने नागपुर के भोंसला से ग्रहण किया था और छत्तीसगढ़ को
1854 में रायपुर में मुख्यालय के साथ अलग सचिव घोषित किया गया था। आजादी के बाद रायपुर जिले को केन्द्रीय प्रांतों और बरार में शामिल किया गया था।

• दूरभाष• +९१-७७१

• गाड़ियां• छ.ग ०४

आधिकारिक जाल स्थल: www.raipur.nic.in

शिक्षा

  • पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय
  • इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय
  • हिदायतुल्ला विधि विश्वविद्यालय
  • कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय 
  • NIT राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान
  • शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय,
  • रायपुर इंस्टीट्यूट आफ़ टेक्नॉलाजी,
  • दिशा इंस्टीट्यूट आफ़ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट
  • जवाहर लाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय
  • शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय
  • होम्योपैथिक महाविद्यालय
  • शासकीय दंत चिकित्सा महविद्यालय
  • इसके अलावा विज्ञान, कला, वाणिज्य के अध्ययन हेतु कई महाविद्यालय है।
  • शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, शासकीय छ्त्तीसगढ महाविद्यालय है।
  • भविष्य में इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भी केन्द्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया जाना है।
  • रायपुर में अधिकांश शासकीय विद्यालय राज्य परीक्षा बोर्ड से और निजी विद्यालय सी बी एस ई से सम्बद्ध हैं।
  • यहां एक शासकीय मुक्त विश्व विद्यालय भी है जिसे पंडित सुंदर लाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है।

पर्यटन स्थल

पलारी का ऐतिहासिक सिद्धेश्वर मंदिर

रायपुर के पर्यटन स्थलों में नगरघड़ी है। यह हर घंटे छत्तीसगढ़ी लोक धुनें सुनाती है। बूढ़ा तालाब, यह शहर का सबसे बड़ा तालाब है जिसे स्वामी विवेकानंद सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, इस तालाब के बीचोबीच एक छोटे से द्वीप पर उद्यान है। दूधधारी मंदिर हिन्दूओं के आराध्य भगवान राम का करीब ५०० साल पुराना मंदिर है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] महंत घासी दास संग्रहालय तथा राजीव गांधी ऊर्जा पार्क जो एक नागरिक वन है, यहां के अन्य दर्शनीय स्थल हैं। यहां सभी झूले सौर ऊर्जा से संचालित हैं।

मनोरंजन


रायपुर में मनोरंजन के लिए पुराने सिनेमाघरों के साथ मल्टीप्लेक्स थियेटर भी हैं। आकाशवाणी का मीडियम वेव पर एक रेडियो स्टेशन २ अक्टूबर १९६४ से कार्य कर रहा है। नई पीढ़ी के लिये ऐफ ऐम बैंड पर नए चैनल्स लाये गए हैं, जिनमें विविध भारती या विज्ञापन प्रसारण सेवा १ जनवरी २००१ को शुरू हुई है। तीन नए रेडियो स्टेशन सन् २००७ में शुरु हुए हैं; इनमें रेडियो मिर्ची, रेडियो रंगीला तथा रेडियो माई एफ एम का चैनल हैं। वर्ष २००९ में बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के एक और नया रेडियो चैनल रेडियो तड़का भी आ गया है। सभी का प्रसारण रायपुर से होता है। टेलीविजन चैनलों में १९७७ में शुरू हुआ, दूरदर्शन का चैनल सर्व प्रथम है।

अब तो दूरदर्शन का डीडी न्यूज़ चैनल भी रायपुर में देखा जा सकता है। सहारा समय, ई टीवी न्यूज, जी छत्तीसगढ़ २४ घंटे, वॉच न्यूज के साथ केबल टीवी के एम० चैनल और ग्रैन्ड चैनल है। इसके अलावा एयरपोर्ट रोड पर एक उर्जा पार्क तथा जी० ई० रोड पर ग्राम सरोना में स्थित नंदन वन है यहां जंगली जानवरों को भी देखा जा सकता है। वर्ष २००९ व २०१० में मेट्रो शहरों के अनुसार शॉपिंग मॉल भी बने हैं। तेलीबांधा में सिटी मॉल व तेलीबांधा के आगे जी.ई. रोड पर मैग्नेटों मॉल, आमानाका के आगे जी.ई. रोड पर आर. के. मॉल तथा देवेन्द्र नगर में छत्तीसगढ़ सिटी सेन्टर बना है।

परिवहन

रेलवे

रायपुर भारतीय रेलवे के हावड़ा-नागपुर-मुंबई मार्ग पर स्थित है। यह भारत के सभी मुख्य शहरों (नई दिल्ली, मुंबई, पुणे, भोपाल, कोलकाता, बैंगलोर, चेन्नई, अमृतसर, इंदौर, रांची, पटना, लखनऊ, बनारस, सूरत, भुवनेश्वर आदि) शहरों से रेलवे मार्ग के द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

हवाई अड्डा

स्वामी विवेकानन्द एअरपोर्ट (माना एअरपोर्ट) रायपुर का निकटतम हवाई अड्डा है।

रोचक तथ्य

  • 1995 में स्थापित की गई रायपुर नगर की नगरघड़ी में छत्तीसगढ़ की 24 लोकधुनों को संयोजित कर लोक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में किया गया प्रयास शायद पूरे विश्व में एक अनूठा है। रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री श्याम बैस के प्रयासों से शुरु की गई नगरघड़ी ग्लोबल एक्सेस पोजिशिन तकनीक से समय बताती है। नगरघड़ी में हर घंटे बजनेवाली लोकधुन पूरे छत्तीसगढ़ राज्य की लोक संस्कृति की अभिव्यक्ति है।
  • ११ सितंबर २००८ को छत्तीसगढ़ के पहले अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शुभारंभ किया गया। ६० हजार की क्षमता वाला यह स्टेडियम कोलकात्ता ईडन गार्डन के बाद देश का दूसरा बड़ा स्टेडियम है। यह स्टेडियम रायपुर से लगभग २० किलोमीटर दूर ग्राम परसदा, मंदिरहसौद में है। इसकी लागत १०० करोड़ आंकी गई है।
  • रायपुर बिलासपुर मार्ग पर डॉ॰ खूबचंद बघेल ट्रांसपोर्टनगर नगर विकसित किया गया है। ९८ एकड़ क्षेत्र में विकसित किए गया यह ट्रांसपोर्टनगर बहुत ही योजनाबध्द ढ़ग से विकसित किया गया है। यहां एक साथ ३००० ट्रकों की पार्किंग की जा सकती है। यही कारण है कि इसे देश के सर्वसुविधायुक्त ट्रांसपोर्टनगर के रूप में माना जा रहा है।
  • छत्तीसगढ़ के पुरखों की संस्कृति और लोकाचार के सबंध में एक खुले संग्रहालय का नाम है पुरखौती मुक्तांगन। छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, पुरातत्व, पर्यावरण और जीव-सृष्टि की सन्निधि में विकास की कल्पना को साकार करने हेतु पुरखौती मुक्तांगन रायपुर से लगभग 20 कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित ग्राम-उपरवारा की लगभग 200 एकड़ भूमि में स्थित है।

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