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‘घेटीपोनी’ स्त्री विक्रय की विचित्र प्रथा

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‘घेटीपोनी’ स्त्री विक्रय की विचित्र प्रथा-

ब्रिटिश अधिकारी ‘चैपमैन’ ने 1898 ई. की अपनी रिपोर्ट में रुद्रप्रताप युगीन बस्तर में प्रचलित एक विचित्र प्रथा का उल्लेख किया है, जो राजा की आमदनी का एक अन्य साधन भी था. वह सुण्डी, कलार, धोबी, पनरा इन चार जातियों की विधवा व परित्यक्ता स्त्रियों को बेच सकता था. वे स्त्रियाँ अपने-अपने परगने के मुख्यालय के नाम से जानी जाती थीं तथा उनकी नीलामी होती थी. खरीददार उसी जाति का होता था. यह प्रथा ‘घेटीपोनी’ के नाम से जानी जाती थी.

घेटीपोनी का अर्थ है ‘कुटुम्ब की बहाली’. जब कोई स्त्री अपने पति के साथ दुर्व्यवहार करती थी, तब कभी कभी उसका रुष्ट पति उसे नीलामी करने के लिए राजा को स्वयं देता था. राजा को पूर्ण अधिकार था कि वह स्त्री को अधिक बोली लगाने वाले को दे.

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