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छत्तीसगढ़ में विनिमय

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छत्तीसगढ़ में विनिमय

मराठा काल में छत्तीसगढ़ में नागपुरी रुपए का चलन था, किन्तु अंग्रेजों ने 5 जून, 1855 से इसका चलन बन्द कर दिया एवं कम्पनी के रुपए को कानूनी तौर पर यहाँ लागू किया. इस समय नागपुरी रुपया कम्पनी के सौ रुपए के बराबर माना गया. अब यहाँ शासकीय भुगतान कम्पनी के रुपए में ही किया जाने लगा.

1 मई, 1855 ई. को कम्पनी का नया सिक्का जारी किया गया. नए और पुराने (नागपुरी और कम्पनी का रुपया) सिक्कों की अदला-बदली हेतु 6 माह का समय दिया गया. मराठा मुद्रा की तुलना में कम्पनी की विनिमय व्यवस्था में एकरूपता थी. नई मुद्रा व्यवस्था से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला तथा लेन देन सुगम हुआ.

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