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छत्तीसगढ़ की जलवायु

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छत्तीसगढ़ की जलवायु

छत्तीसगढ़ प्रदेश की जलवायु उष्णार्द्र अथवा उपार्द्र प्रकार की है। थार्नथ्वेट के वर्गीकरण के अनुसार यह प्रदेश CA’W (Tropical subhumid with rainfall deficient in winter) तथा कोपेन के अनुसार AW (Tropical wet and dry climate) तथा CWg (Humid mesothermal warm climate with dry winter) वर्गीकरण के अन्तर्गत आता है। कर्क रेखा पर स्थित होने के फलस्वरूप यह प्रदेश गर्म है अतः ग्रीष्म ऋतु अत्यधिक गर्म व शीतऋतु थोड़ी ठंडी होती है। समुद्र से दूर स्थित होने के कारण छत्तीसगढ़ प्रदेश समुद्र के समकारी प्रभाव से दूर है।

क. तापमान :- 

21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण होता है तथा 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत चमकता है, फलस्वरूप तापमान में वृद्धि होती है। अतः मार्च से जून तक सम्पूर्ण प्रदेश में तापमान बढ़ने लगता है। औसत तापमान सबसे अधिक रायगढ़ में 46.10 सेंटीग्रेड तथा सबसे कम 42.20 सेंटीग्रेड कांकेर में रहता है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान मई माह में (450 सेंटीग्रेड) होता है।

जून में मानसून के आगमन के साथ ही तापमान में कमी दृष्टिगोचर होती है। आर्द्रता तथा मेघाच्छादित आकाश के कारण जून की अपेक्षा जुलाई के तापमान में कमी आती है। इस समय प्रदेश का तापमान 26.250 सेंटीग्रेड होता है। सितम्बर तक तापमान में अधिक भिन्नता नहीं होती है।

ख. वर्षा :-

प्रदेश में वर्षा मानसूनी प्रकृति की है तथा वर्षा की औसत मात्रा 1627 मिमी. है। रायपुर में 1388.2, कांकेर में 1394.8, जगदलपुर में 1534.1, अम्बिकापुर में 1404.8; चांपा में 1429.1, पेंड्रा में 1462 तथा रायगढ़ में 1627 मिमी. औसत वर्षा होती है। अधिकांश वर्षा (94 प्रतिशत) जून से अक्टूबर के मध्य बंगाल की खाड़ी की मानसूनी हवाओं द्वारा होती है। प्रदेश में मानसून का आगमन 10 से 15 जून तक होता है। जुलाई तथा अगस्त सर्वाधिक वर्षा के महीने हैं। राजनांदगाँव जिले के पश्चिम में स्थित मैकल श्रेणी का पूर्वी भाग अरब सागरीय मानसूनी हवाओं के मार्ग में अवरोध डालकर इस क्षेत्र में वृष्टि छाया का प्रभाव उत्पन्न करता है। 10 अक्टूबर के आस-पास प्रदेश से मानसून लौट जाता है।

ग. ऋतुएं :-

छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से तीन ऋतुएं पाई जाती है .  

ग्रीष्म ऋतुएं  :- 

  • छत्तीसगढ़ में ग्रीष्म ऋतुएं गर्म एवं शुष्क होती है .  
  • 21 मार्च के उपरांत सूर्य की किरणे उत्तरी गोलार्थ में सीधी लम्बवत पड़ती है ,जिससे तापमान में वृद्धि हो जाती है .  
  • यहाँ अप्रैल और मई में झुलसाने वाली गर्मी तथा जुलाई से अक्टूबर में बादलों के कारण उमस होती है .  
  • मई का महिना में सबसे ज्यादा गर्मी होती है , अधिकतम तापमान चाम्पा और रायगढ़ में अंकित की जाती है .  
  • सबसे ज्यादा गर्म स्थान चाम्पा है .  

शीत ऋतुएं :- 

  • यहाँ शीत ऋतुएं ठंडी एवं शुष्क होती है .  
  • 21 सितम्बर के बाद सूर्य की स्थिति दक्षिणायन होने लगाती है, और सूर्य की किरणे तिरछी पड़ने लगाती है .  
  • दिसम्बर और जनवरी में सर्वाधिक ठंडी पड़ती है   
  • पहाड़ी भागों में स्थित पेंड्रा, मैनपाट, जशपुर, न्यूनतम तापमान वाले क्षेत्र है, ऐसा समुन्द्रतल से अधिक ऊंचाई और वनाधिक्य के कारण है .  

वर्षा ऋतुएं :- 

  • छत्तीसगढ़ में वर्षा की प्रकृति मानसूनी है , वर्षा ऋतुएं गर्म एवं आर्द्र होती है .  
  • 90 प्रतिशत वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसूनी हवाओ के द्वारा होता है .  
  • 21 जून को कर्क रेखा के समीप सूर्य की लम्बवत स्थिति होती है ,जिससे गर्मी और तापमान में वृध्दि होती है न्यून वायुदाब की स्थिति बनती है .  
  • हिन्द महासगार के दक्षिणी भाग से मानसूनी हवाएं आकर्षित होती है और वर्षा होती है .  
  • प्रदेश में औसत वर्षा लगभग 120-125 से. मी. होती है .  
  • छत्तीसगढ़ में मैकल पर्वत श्रेणी के निकट न्यूनतम वर्षा होती है इसे वृष्टिछाया प्रदेश कहते है
  • राजनंदगांव और कवर्धा जिला .   भानुप्रतापपुर, जशपुर तहसीलों में सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा होती है .  
  • जिलेवार सर्वाधिक वर्षा जशपुर में होती है   
  • सबसे कम वर्षा कवर्धा जिला में होती है .  
  • नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ प्रदेश का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है .

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