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राजनीतिक क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के व्यक्तित्व

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राजनीतिक क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के व्यक्तित्व

पंडित सुंदरलाल शर्मा:[ इनके बारे में और जानें ]

छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम संकल्पनाकार, छत्तीसगढ़ के गांधी, हरिजन ब्राम्हण का जन्म 1881 में चमसुर, राजिम में हुआ था। ये छत्तीसगढ़ (अविभाजित मध्यप्रदेश) में राष्ट्रीय जागरण के अग्रदूत थे। जिन्होंने 1925 में राजिम के राजीव लोचन मंदिर में 1500 अछूतो को प्रवेश कराया था। तथा रायपुर में सतनामी आश्रम की स्थापना की थी। इन्होंने स्वतंत्रा संग्राम में भी भाग लिया और कंडेल नहर सत्याग्रह तथा सिहावा जंगल सत्याग्रह का नेतृत्व किया।

पंडित रविशंकर शुक्ल:[ इनके बारे में और जानें ]

स्वतंत्रा संग्राम सेनानी रविशंकर शुक्ल का जन्म 2 अगस्त 1877 में मध्यप्रदेश के सागर में हुआ। इन्हें अधुनिम मध्यप्रदेश का निर्माता भी कहा जाता है। 1936 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में छत्तीसगढ़ के प्रथम व्यक्ति थे। 1930 में रायपुर में सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किया।

ठाकुर प्यारेलाल:[ इनके बारे में और जानें ]

छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन के जनक ठाकुर प्यारेलाल का जन्म 1891 में दैहान, राजनांदगांव में हुआ था। इन्होंने राजनांदगांव में 1920 में 37 दिन तक चले बी.एन.सी. मील हड़ताल का नेतृत्व किया। 1930 में “पट्टा मत लो” आंदोलन का भी नेतृत्व किया था।

पंडित वामन बलीराव लाखे[ इनके बारे में और जानें ]

इन्होंने रायपुर में सहकारी आंदोलन की शुरुवात की। इन्हें लोकप्रिय उपनाम से भी जाना जाता था। इन्होंने रायपुर में को-ऑपरेटिव की स्थापना की तथा 1920 के असहयोग आंदोलन, 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया।

ठाकुर छेदीलाल:[ इनके बारे में और जानें ]

इनका जन्म 1859 में जांजगीर-चाँम्पा जिले के अकलतरा में हुआ था। इन्होंने असहयोग, सविनय अवज्ञा, व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया।1946 में संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य निर्वाचीत हुए।

डॉ. राघवेंद्र राव:[ इनके बारे में और जानें ]

इनका जन्म 4 अगस्त 1889 में कामठी नागपुर में हुआ। आई.सी.एस की परीक्षा उत्तीर्ण कर ब्रिटिश शासन के अधिकारी बने, किन्तु जनसेवा की भावना से बैरिस्टरी प्रारम्भ कर दिया। 1927 में असेम्बली चुनाव में विजयी हुए और शिक्षा मंत्री बने। 1936 में मध्यप्रान्त के गवर्नर तथा 1942 में वायसराय की कार्यकारिणी सदस्य में छत्तीसगढ़ के एक मात्र सदस्य बने।

माधवराव सप्रे:[ इनके बारे में और जानें ]

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक माधवराव सप्रे का जन्म 1871 में हुआ था। इन्होंने 1900 में प्रथम समाचार पत्र छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकासन पेंड्रा रोड से किया। 1911 में महिला शिक्षा हेतु जानकीदेवी कन्या शाला की स्थापना की। राजिम में किसान सभा का गठन किया।

डॉ. खूबचंद बघेल:[ इनके बारे में और जानें ]

छत्तीसगढ़ महासभा तथा छत्तीसगढ़ भतृसंघ के संस्थापक खूबचंद बघेल का जन्म 19 जुलाई 1900 में पथरी ग्राम में रायपुर जिले में हुआ। इन्होंने “छत्तीसगढ़ का सम्मान” की रचना की थी।

मिनीमाता: [ इनके बारे में और जानें ]

छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद मीनाक्षी (मिनीमाता) का जन्म 1913 में असम के दौलगाँव मे हुआ था। इन्होंने छत्तीसगढ़ मजदूर संघ का गठन भी किया था।

डॉ. राधाबाई [ इनके बारे में और जानें ]

प्रथम सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान रायपुर कांग्रेस द्वारा नियुक्त आठ डिटेक्टरों में वे एक थीं. डॉ. राधाबाई 1930 से 1942 तक सत्याग्रह में भाग लेती रहीं. वे जेल में भी सत्याग्रही व साधारण महिला कैदियों को आध्यात्मिक उन्नति और सत्याग्रह की प्रेरणा देती रहीं, जेल से बाहर छूटते ही वे सेवा में रत हो जाती.

प्रवीरचंद्र भंजदेव[ इनके बारे में और जानें ]

इनका व्यक्तित्व आकर्षक था. गौरवर्ण, इकहरा शरीर, मझोला कद, चेहरे पर राजसी कांति, लंबे केश, भारतीय पोषाक उनके व्यक्तित्व के आकर्षण थे. देखने में ऋषिपुत्र की भाँति वे धार्मिक तथा अध्यात्मवादी थे. राष्ट्रीय विचारों का आदर करते थे तथा अन्याय को सहने की शक्ति उनमें न थी, अतः अपने पिता की ही भाँति अंग्रेजी शासन की टेड़ी नजर का शिकार उन्हें होना पड़ा. वस्तर के आदिवासी उन्हें भगवान् की तरह पूजते थे.

ठाकुर रामप्रसाद पोटाई [ इनके बारे में और जानें ]

ठाकुर रामप्रसाद पोटाई 1948 के रियासती विलीनीकरण के उपरांत जमींदारी उन्मूलन एवं भूदान आंदोलन से पोटाई निरंतर जुड़े रहे. उन्होंने जनजातियों एवं गैर जनजातीय कृषक, खेतिहरों को सामाजिक उत्थान एवं राष्ट्र सेवा में समर्पित होने हेतु प्रेरित किया. 1962 चीन-भारत युद्ध में एवं 1971 के भारत पाक युद्ध के समय युवकों एवं सामाजिक संगठनों को राष्ट्रीय हित में धन देने एवं सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा देने का कार्य किया.

गहिरा गुरु [ इनके बारे में और जानें ]

स्वतंत्रता के पश्चात उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन पीड़ित मानवता की सेवा एवं कमजोरों के उत्थान में लगा दिया. गहिरा- गुरु देश की पराभूत अवस्था से विचलित हो स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे. मानव सेवा ही उनका धर्म था और उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन आदिवासियों के उत्थान में लगा दिया.

पं. रामदयाल तिवारी [ इनके बारे में और जानें ]

वे एक समर्थ समालोचक थे. सन् 1930 के बाद उन्होंने अपना अधिक समय साहित्य सेवा में लगाया. 1935 में वे एक मोटर दुर्घटना में घायल हो गए तथा उन्हें कई महीने अस्पताल में रहना पड़ा. इस अवधि में उन्होंने गांधी मीमांसा की रचना की. गांधीजी पर लिखे ग्रंथ से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाने लगा. उन्होंने अपने विचारों व लेखनी के माध्यम से राष्ट्रीय आंदोलन को शक्ति प्रदान की.

घनश्याम सिंह गुप्त: [ इनके बारे में और जानें ]

घनश्याम सिंह को छत्तीसगढ़ का विधान पुरुष कहा जाता है। 1937 में मध्यप्रान्त के विधानसभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 1942 में संविधान सभा के सदस्य चुने गये थे।

माता राजमोहनी देवी:[ इनके बारे में और जानें ]

इन्होंने छत्तीसगढ़ में भू-दान आंदोलन में भाग लिया। 1953 में मध्य निषेद आंदोलन चलाया। 1986 में समाजसेवा हेतु इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

राजा रामानुज प्रताप सिंह देव:[ इनके बारे में और जानें ]

बैकुंठपुर कोरिया रियासत के प्रताप सिंह देव ने 1946 में कोरिया रियासत में पंचायती राज व्यवस्था प्रारम्भ की थी। साथ ही स्कूलो में मध्यान भोजन की सुरुवात य की। इन्होंने लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन में भाग भी लिया था।

यती यतनलाल:[ इनके बारे में और जानें ]

इन्होंने महासमुंद में जंगल सत्याग्रह का नेतृत्व किया। इन्होंने महासमुंद में विवेक वर्धन आश्रम की स्थापना की।

चंदूलाल चंद्राकर:[ इनके बारे में और जानें ]

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पत्रकार चंदूलाल चंद्राकर का जन्म 1921 में निपानी ग्राम में हुआ था। 1970 में लोकसभा के लिये निर्वाचीत हुये।

श्यामा चरण शुक्ल[ इनके बारे में और जानें ]

स्वतंत्राता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ थे।1969-72, 1975-77 तथा वर्ष 1989-90 में अविभाजित मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने का गौरव मिला। वर्ष 1990 में वह राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता रहे।

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