छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना

छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना


राज्य की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना दिनांक 20 जुलाई, 2020 को हरेली पर्व के शुभ अवसर पर प्रारंभ की गई। इस योजना के अंतर्गत राज्य में पशुधन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गांव में गोठान स्थापित किया जा रहे हैं। गोठान की गतिविधियों का विस्तारण कर गोठान में गोबर क्रय करते हुए संग्रहित गोबर से वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं, इससे जैविक खेती को बढ़ावा, रोजगार के नये अवसर, गौ-पालन एवं गौ-सुरक्षा को प्रोत्साहन के साथ-साथ गोठानों व स्व-सहायता समूह को स्वावलंबी बनाया जा रहा है।

  • राज्य में कुल 9912 गोठान स्वीकृत किया गया है और 5586 गोठान निर्मित है।
  • 20 जुलाई 2020 से 15 मई 2021 तक 47.65 लाख क्विंटल गोबर क्रय किया गया है। 15 मार्च तक क्रय गोबर की राशि रूपये 88 करोड 15 लाख का भुगतान किया जा चुका है। 15 मार्च से 15 मई तक क्रय की गई गोबर की राशि रूपये 7 करोड़ 17 लाख भुगतान किया जा रहा है, इस प्रकार अब तक भुगतान योग्य कुल राशि रूपये 95 करोड़ 31 लाख है।
  • योजना से कुल 1 लाख 65 हजार 521 पशुपालकों को लाभान्वित किया गया पशुपालकों में 44.51 प्रतिशत महिलाएं, 47.7 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 7.77 प्रतिशत अनुसुचित जाति, 40.97 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के हैं। इसमें 73 हजार 945 भूमिहीन है।
  • क्रय गोबर से 2 लाख 26 हजार 316 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया गया है, तथा 1 लाख 21 हजार 172 क्विंटल (54%) विक्रय किया जा चुका है।
  • सुपर कम्पोस्ट- गोठानों में वर्मी कम्पोस्ट के साथ-साथ उच्च जैविक विशेषताओं वाले अपेक्षाकृत सस्ते खाद, जो सुपर कम्पोस्ट के नाम से जानी जाएगी, तैयार की जा रही है। खाद का न्यूनतम मूल्य 6 रुपये प्रति किलो है।
  • 8 हजार 841 स्व-सहायता समूहों के 63 हजार सदस्यों द्वारा विभिन्न संचालित गतिविधियों (सामुदायिक बाड़ी, मशरूम उत्पादन, सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन, पशुपालन, मछली पालन, गुलाल, गोबर के दिए निर्माण, गोबर का गमला निर्माण, गोबर की लकड़ी आदि शामिल है) से प्राप्त आय राशि 18.64 करोड़ रूपए है
  • राज्य में 740 गोठान स्वावलंबन की ओर अग्रसर हो रहे है।