उदयपुर का विद्रोह

उदयपुर का विद्रोह इससे पहले पढ़ें : रायपुर में सैन्य विद्रोह : हनुमान सिंह का शौर्य सरगुजा राजपरिवार की एक शाखा उदयपुर में राज्य कर रही थी. यहाँ 1818 ई. में ब्रिटिश संरक्षण काल में कल्याण सिंह राजा थे. 1852 ई. में यहाँ के राजा और
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रायपुर में सैन्य विद्रोह : हनुमान सिंह का शौर्य

रायपुर में सैन्य विद्रोह : हनुमान सिंह का शौर्य इससे पहले पढ़ें : सोनाखान का विद्रोह  10 दिसम्बर, 1857 को वीर नारायण सिंह की शहादत के बाद 10 जनवरी, 1858 तक अंचल में घोर अशांति बनी रही. नारायण सिंह को फाँसी देने की घटना से छत्तीसगढ़
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सम्बलपुर के सुरेन्द्र साय का विद्रोह

सम्बलपुर के सुरेन्द्र साय का विद्रोह इससे पहले पढ़ें : सोनाखान का विद्रोह  सन् 1827 ई. में सम्बलपुर के चौहान राजा महाराजसाय की मृत्यु बिना उत्तराधिकारी के हो गई. चौहानवंश की परम्परा के अनुसार सम्बलपुर की राजगद्दी पर उनकी राजपुर-खिंडा
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सोनाखान का विद्रोह

सोनाखान का विद्रोह मानवता एवं शौर्य के प्रतीक छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह इससे पहले पढ़ें : छत्तीसगढ़ में 1857 क्रान्ति का प्रभाव सोनाखान जमींदारी- सोनाखान के जमींदार बिंझवार राजपूत थे. यह जमींदारी क्षेत्र कलचुरियों
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छत्तीसगढ़ में 1857 क्रान्ति का प्रभाव

छत्तीसगढ़ में 1857 क्रान्ति का प्रभाव इससे पहले पढ़ें : 1857 की क्रान्ति एवं छत्तीसगढ़ जब 1854 ई. में छत्तीसगढ़ का क्षेत्र ब्रिटिश साम्राज्य का अंग बन गया तब यहाँ किसी विद्रोह की सूचना नहीं मिली, पर अधिकारियों की गलत नीतियों के कारण
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1857 की क्रान्ति एवं छत्तीसगढ़

1857 की क्रान्ति एवं छत्तीसगढ़ 1757 ई. के प्लासी के युद्ध से बंगाल में एक राजनीतिक सत्ता के रूप में स्थापित अंग्रेज अगले पचास वर्षों में समूचे भारत के एक मात्र और निर्विवाद शक्ति बन गए. यहाँ पैर जमाने के बाद अंग्रेजों ने प्रत्येक
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छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन का प्रभाव

छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन का प्रभाव सन् 1741 ई. से 1854 ई. तक छत्तीसगढ़ में नागपुर के भोंसलों का शासन रहा. मराठा शासन काल में छत्तीसगढ़ उपेक्षित रहा. उन्होंने अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए इसे एक उपनिवेश के रूप में देखा और उसका
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छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था

छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था मराठा काल में छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था का कोई संगठित प्रबन्ध नहीं था. इस क्षेत्र में शिक्षा का प्रसार अल्प था. अंग्रेजी सत्ता की स्थापना के बाद इस दिशा में एक व्यवस्थित प्रयास आरम्भ हुआ. हिन्दी के साथ
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छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक कल्याण व स्थानीय संस्थाएँ

छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक कल्याण व स्थानीय संस्थाएँ छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक कल्याण 1854-55 ई. में जन सुविधा एवं उसके कल्याण हेतु ब्रिटिश शासन ने यहाँ सत्ता सम्हालते ही सार्वजनिक कल्याण विभाग की स्थापना की. इस विभाग द्वारा सड़क, पुल, नहर,
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छत्तीसगढ़ में वन संसाधन

छत्तीसगढ़ में वन मराठा काल में वनों का कोई व्यवस्थित प्रबन्ध नहीं किया जाता था. वनोपज आवश्यकतानुसार जमींदारों के माध्यम से प्राप्त किया जाता था. साथ ही वनोपज का व्यापार विकसित नहीं था. अंग्रेजी शासनकाल में पृथक् वन विभाग की स्थापना की
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