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छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन

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छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन

नागपुर राज्य के अंग्रेजी साम्राज्य में विलय के साथ ही छत्तीसगढ़ प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश शासन का अंग बन गया. यद्यपि बिलय की घोषणा 13 मार्च, 1854 को की गई थी तथापि 1 फरवरी, 1855 को छत्तीसगढ़ के अन्तिम मराठा जिलेदार गोपालराव ने यहाँ के शासन के लिए नियुक्त ब्रिटिश शासन के प्रतिनिधि प्रथम डिप्टी कमिश्नर चार्ल्स सी इलियट को सौंपा. उनका अधिकार क्षेत्र वही था जो ब्रिटिश नियंत्रण काल में मि. एगन्यू का था. इस प्रकार 1854 ई. में ही छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी राज्य की स्थापना हुई जो सन् 1947 तक बनी रही. ब्रिटिश शासन के अन्तर्गत सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ सूबे को एक जिले का दर्जा प्रदान किया गया जिसका प्रमुख अधिकारी डिप्टी कमिश्नर कहा गया. डिप्टी कमिश्नर को प्रशासन के कार्यों में सहयोग देने के लिए एक सहायक कमिश्नर तथा एक अतिरिक्त सहायक कमिश्नर की नियुक्ति का प्रावधान भी था. अतिरिक्त सहायक कमिश्नर का पद केवल भारतीयों के लिए सुरक्षित था. इस पद पर गोपालराव आनन्द और मोहिदुल हसन को क्रमशः बिलासपुर और रायपुर में नियुक्त किया गया. अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में यहाँ अनेक परिवर्तन किये साथ ही विकास और ज्ञान विज्ञान का विस्तार आरम्भ किया.

छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश प्रशासन का नवीन स्वरूप

कमिश्नर मि. मेन्सल ने छत्तीसगढ़ में नव नियुक्त डिप्टी कमिश्नर को यह निर्देश दिया कि क्षेत्रीय प्रशासन को स्थानीय परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए स्थापित किया जाए और ऐसे पूर्व सरकारी कर्मचारियों, जो योग्य हों एवं ब्रिटिश शासन की सेवा करने के इच्छुक हों, को उनकी योग्यतानुसार रिक्त स्थानों पर नियुक्त किया जाए, साथ ही छत्तीसगढ़ के असैनिक प्रशासन का पुनर्गठन कर यहाँ पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था (जो वहाँ उपयोगी सिद्ध हुई) को लागू किया जाए. इसके अन्तर्गत प्रशासन को दो वर्गों-माल और दीवानी में विभक्त किया गया तथा डिप्टी कमिश्नर को दीवानी शाखा के प्रशासन हेतु दोनों, मूल और अपील सम्बन्धी अधिकार सौंपे गये जो ₹5000 से ऊपर के होते वे. बाद में तहसीलदारों को नियुक्त कर उन्हें भी (कम राशि के) दीवानी और फौजदारी से सम्बन्धित अधिकार सौंपे गए. द्रुत संचार हेतु डाक व्यवस्था को दुरुस्त कर हरकारे तैनात किए गए. सामान्य प्रशासन में जमींदारों, रियासत प्रमुखों और उच्च मध्यम वर्ग से सहयोग लेने की नीति बनाई गई, जिससे चुने हुए वफादार वर्ग तैयार हों और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रशासन को विकसित करने में सहयोग प्राप्त हो.

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