Sahity.in से जुड़ें @WhatsApp @Telegram @ Facebook @ Twitter

बैरिस्टर छेदीलाल

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

बैरिस्टर छेदीलाल

बैरिस्टर छेदीलाल का जन्म सन् 1887 में अकलतरा (बिलासपुर) में हुआ था. अकलतरा में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद माध्यमिक शिक्षा बिलासपुर के म्यूनिसिपल हाईस्कूल से प्राप्त की. शिक्षा के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में इनकी गहन रुचि थी. राजनीति में उनका झुकाव बचपन से ही था. सन् 1901 में माध्यमिक शिक्षा पूर्ण कर वे उच्च शिक्षा रायपुर से प्राप्त करने के पश्चात् उच्चतर शिक्षा हेतु प्रयाग गये. विशेष योग्यता के कारण उन्हें छात्रवृत्ति मिलती रही.

इंगलैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उन्होंने अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र व इतिहास विषय लेकर बी. ए. ऑनर्स की उपाधि प्राप्त करने के बाद इतिहास में एम. ए. किया. सन् 1913 में वे बैरिस्टर की उपाधि लेकर भारत लौटे. वे बिलासपुर के प्रथम वैरिस्टर एवं छत्तीसगढ़ से विलायत जाने वाले प्रथम व्यक्ति थे. विलायत में भारतीय क्रांतिकारियों से उनका सम्पर्क हुआ. उन दिनों हॉलैण्ड के स्वाधीनता आंदोलन के प्रति उनकी गहरी सहानुभूति थी, जिसकी अभिव्यक्ति उनके द्वारा लिखित “हॉलैण्ड स्वाधीनता का इतिहास” से होती है. स्वदेश वापसी के पश्चात् ठाकुर साहब द्वारा अकलतरा में रामलीला के नाटकों के माध्यम से जनजागरण का कार्य किया जाता था.

बैरिस्टर-ठाकुर-छेदीलाल
बैरिस्टर-ठाकुर-छेदीलाल

वैरिस्टर छेदीलाल जी गांधीवादी विचार से प्रभावित होकर 1920 के असहयोग को सफल बनाने के लिए सक्रिय रूप से जुट गए. उन्होंने वकालत का परित्याग किया. 1920 में उनका प्रयास राष्ट्रीय जागरण के साथ सामाजिक सेवा भी करना था. मध्य प्रदेश कांग्रेस समिति का गठन 1921 में सागर में किया गया, जिसमें अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के प्रतिनिधियों का निर्वाचन हुआ. ठाकुर छेदीलाल भी इसमें निर्वाचित किये गये. असहयोग कार्यक्रमांतर्गत गठित ‘राष्ट्रीय शिक्षा मंडल’ में इन्हें भी लिया गया. इस मण्डल का गठन राष्ट्रीय विद्यालयों के नियंत्रण के लिये किया गया था.

नागपुर के झण्डा सत्याग्रह में भी उन्होंने भाग लिया. वे 1923 में स्वराज्य पार्टी के प्रमुख समर्थक थे. उन्होंने मध्यप्रांत परिषद् में स्वराज्य पार्टी के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य किया. सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत् बिलासपुर में 25 फरवरी, 1932 को पिकेटिंग के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. महाकौशल, नागपुर, विदर्भ कांग्रेस के संयुक्त सम्मेलन में वे सभापति बनाये गये. सम्मेलन में दिये गये भाषण की प्रतिक्रिया स्वरूप उन्हें बंदी बनाकर उनके वकालत के लाइसेंस को निरस्त कर दिया गया.

1940-41 में व्यक्तिगत सत्याग्रह के आरोप में ठाकुर छेदीलाल सहित अन्य नेताओं को गिरफ्तार किया गया. 1942 में 6 अगस्त को बिलासपुर में भारत छोड़ो आंदोलन के परिणामस्वरूप उन्हें 3 वर्ष कैद की सजा दी गई. स्वतंत्रता के पश्चात् भी वे राष्ट्रीय सेवा कार्य में लगे रहे. सितंबर 1956 में दिल का दौरा पड़ने से बैरिस्टर साहब का देहांत हो गया. वे एक श्रेष्ठ लेखक, विचारक एवं जनचेतना के प्रणेता थे.

25 जून, 1930 को इन ‘पांडवों’ को रात्रि में उनके घरों से ही गिरफ्तार किया गया फलस्वरूप पूरे नगर में हड़ताल रही. 4 जनवरी, 1932 को गांधीजी को गिरफ्तार किया गया. रायपुर में भी आंदोलन की आग भड़क उठी. 15 फरवरी, 1932 को मौलाना रऊफ को गिरफ्तार किया गया. उन्हें दो वर्ष कैद एवं ₹75 जुर्माना किया गया. 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में उन्हें चार बार गिरफ्तार किया गया. 1942 में उन्हें ढाई वर्ष की सजा हुई. रिहा होने के कुछ ही महीने बाद 27 मार्च, 1945 को उनका देहांत हो गया.
उनका सम्पूर्ण जीवन गरीबी और कष्ट में ही बीता. वे एक अच्छे साहित्यकार थे, पं. सुंदरलाल शर्मा कृत ‘जेल समाचार पत्र’ में उनके विचार उल्लिखित हैं, वे सामाजिक सद्भाव के प्रणेता थे. उन्होंने साम्प्रदायिकता का विरोध कर सामाजिक सद्भाव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave a comment