Sahity.in से जुड़ें @WhatsApp @Telegram @ Facebook @ Twitter

छत्तीसगढ़ में पशु संसाधन

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

छत्तीसगढ़ में पशु संसाधन

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन एक महत्वपूर्ण गतिविधि है जिससे कृषि पर आश्रित परिवारों को अनुपूरक आय तो प्राप्त होती ही है, साथ ही पशु उत्पाद प्रोटीन का प्रमुख स्त्रोत भी है। सूखा एवं अन्य प्राकृतिक विपदाओं जैसे आकस्मिता के समय पशुधन ही आय का एक मात्र स्त्रोत के रूप में उपलब्ध होता है। इस प्रकार पशुधन ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान रखता है।

छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 1.27 करोड़ पशुधन संख्या है। जिसमें गौ वंशीय पशु संख्या 64 प्रतिशत, बकरी 16 प्रतिशत, भैंस वंशीय 14 प्रतिशत एवं भेड़-सूकर संख्या 06 प्रतिशत है। प्रदेश में 3.6 मिलियन ग्रामीण परिवार है, जिसमें से 18 प्रतिशत भूमिहीन, 24 प्रतिशत उप सीमांत कृषक एवं 19.5 प्रतिशत सीमांत परिवार है। 19वीं पशु संगणना के अनुसार 52.59 प्रतिशत ग्रामीण परिवार पशुपालन का कार्य करते है जिसमें से 42.8 प्रतिशत परिवार भेड़-बकरी पालन एवं 67.9 प्रतिशत परिवार कुक्कुट-पालन का कार्य करते है। छोटे एवं अर्द्धमध्यम किसान परिवार के लगभग 50.6 प्रतिशत गौ-वंशीय पशु एवं 52.4 प्रतिशत भैस-वंशीय पशुओं का पालन करते है। इससे स्पष्ट है कि ग्रामों में गरीबी उन्नमूलन हेतु पशुपालन की अहम भूमिका है।

प्रदेश में विभिन्न प्रजातियों की पशुधन संख्या –

प्रमुख पशुधनवर्ष 2003(17 वीं पशु संगणना)वर्ष 2007(18 वीं पशु संगणना)वर्ष 2013(19 वीं पशु संगणना)
गौ एवं भैंस वंशीय (लाख)104.80111.00112.03
उन्नत गौ वंशीय (लाख)2.534.1416.40
बकरी /भेड़ (लाख)24.5629.0833.93
कुक्कुट (लाख)81.81142.46179.55

पशुपालन के चार स्तंभ कुशल प्रबंधन, संतुलित पोषण, उन्नत प्रजनन और रोग नियंत्रण को दृष्टिगत रखते हुये पशुधन विकास विभाग का उद्देश्य समयबद्ध तरीके से पशु स्वास्थ्य सेवा, प्रशिक्षण एवं विस्तार सेवा के माध्यम से राज्य के पशुधन उत्पाद में वृद्धि करना है। उन्नत पशु-पक्षी प्रदाय कर पशुधन आधारित जीविकोपार्जन के साधनों में बढ़ोतरी करते हुए राज्य के छोटे पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

इस प्रकार पशुधन ग्रामीण परिवार को सुनिश्चित आय के साधन तो प्रदान करते ही है, साथ ही रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराते है। पशुधन से दूध, अण्डे, मांस, ऊन, चमड़े परिवहन हेतु उर्जा, जैविक खाद एवं रसोई हेतु उपले आदि उपलब्ध होते हैं। पशुपालन में क्रांतिकारी परिवर्तन, छोटे पशुपालकों को गरीबी एवं कुपोषण से मुक्ति तथा बाजार अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा से जुड़कर आर्थिक विकास में सहायक होगा, इसे सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट पशुधन विकास एवं प्रजनन नीति का सृजन किया गया है। नीति अन्तर्गत राज्य में पशुधन विकास के सभी पहलुओं/परिस्थितियों की प्राथमिकताओं, क्षमताओं एवं संभावनाओं का निर्धारण किया गया है।

पशु स्वास्थ्य रक्षा एवं विकास कार्यो हेतु संचालित संस्था-

पशु चिकित्सालय – 320

पशु औषधालय – 822

पशु रोग अनुसंधान प्रयोगशाला – 16

चलित पशु चिकित्सा इकाई – 27

कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र – 22

कृत्रिम गर्भाधान उपकेन्द्र – 249

मुख्य ग्राम खण्ड – 10

मुख्य ग्राम खण्ड उपकेन्द्र – 99

­

प्रदेश मेें पशु उत्पाद की स्थिति –

पशु उत्पादछत्तीसगढ़(2002-03)छत्तीसगढ़(2015-16)राष्ट्रीय औसत(2012-13)
दुग्ध (मिलियन टन)8041277132.4
अण्डा (लाख)779015028697307
मांस (हजार टन)8399413865252

प्रति व्यक्ति पशु उत्पाद की उपलब्धता –

पशु उत्पादछत्तीसगढ़(2001-02)छत्तीसगढ़(2013-14)राष्ट-वतकयिीय औसत(2010-11)
दुग्ध (ग्राम प्रतिदिन)104130261
अण्डा (संख्या प्रतिवर्ष)375658
मांस (कि.ग्रा. प्रतिवर्ष)0.361.414.998

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave a comment