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बिलासपुर नगर एक परिचय [Bilaspur city an introduction]

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बिलासपुर नगर एक परिचय [Bilaspur city an introduction]

बिलासपुर नगर छत्तीसगढ़ में 22’5° उत्तरी अक्षांश एवं 82’10° पूर्वी देशांतर पर ‘अरपा नदी के तट पर बसा है. इसकी समुद्र तल से ऊँचाई 853 फीट है.

नामकरण

प्राचीनकाल में यह क्षेत्र रतनपुर राज्य के अन्तर्गत आता था, रतनपुर में रत्नदेव द्वितीय (1120-1135) ई.) के समय वर्तमान बिलासपुर के स्थान पर घना जंगल था, जहाँ केवट जाति के कुछ परिवार थे. किंवदंती के अनुसार एक बार महाराज रत्नदेव आखेट हेतु इस वन क्षेत्र में आये. शिकार का पीछा करते हुए उनके कुछ सैनिक आगे निकल गये तथा केवट की बस्ती में पहुँच कर चना बेचने वाली ‘बिलासा’ (बिलसिया) नाम की कन्या से उन्होंने दुर्व्यवहार किया, जिस पर आत्मग्लानि से भरी बिलासा ने आत्मदाह कर लिया. इस घटना की जानकारी होने पर राजा ने दोषी सैनिकों को कठोर दण्ड दिया तथा प्रायश्चितस्वरूप उस सती के नाम पर उसी स्थान पर बिलासा ग्राम बसाया. वही बिलासा ग्राम कालान्तर में विलासपुर के नाम से एक नगर के रूप में स्थापित हुआ.

फोरसिथ के अनुसार बिलासपुर का नाम पलास के कारण ही पड़ा. इस क्षेत्र का नाम पलाश पर आधारित है. पलाश पर आधारित दोना-पत्तल का व्यवसाय आज भी यहाँ प्रचलित है,

बिलासा का विवरण क्षेत्र के देवार गीतों में मिलता है, किंतु इन गीतों में भी बिलासा शौर्य की प्रतिमा एवं देवी स्वरूप है उसके ऊपर अत्याचार का विवरण इनमें नहीं है. अतः अत्याचार होना एवं उस पर आधारित नामकरण एक कहानी है जिसे इतिहास में जोड़ दिया गया है. पलाशपुर को बिलासपुर सम्भवतः अंग्रेजों ने ही किया जैसा वे हिन्दी शब्द कपाट को कवाट कहते थे उसी प्रकार पलाश को वेलास कहने लगे और यह बेलासपुर हो गया जो आगे चलकर बिलासपुर हुआ.

इतिहास

रतनपुर राज्य के मराठा शासक बिम्बाजी भोंसले के काल में 1770 में बिलासपुर को नगर का रूप दिया गया. बिलासपुर को जिले का दर्जा 1861 में प्राप्त हुआ था. संभागीय मुख्यालय 1956 में बना. जिले की स्थापना के समय यह बहुत बड़ा था अतः 1906 में दुर्ग जिला बनने पर बिलासपुर का 363 वर्गमील क्षेत्र दुर्ग में तथा 706 वर्गमील क्षेत्र रायपुर में मिला दिया गया. इसके बाद बिलासपुर का 70 वर्गमील क्षेत्र ओडिशा प्रांत में मिला दिया गया. जिले का प्रथम बंदोबस्त 1868 में मि. चिसम् ने एवं दूसरा 1888 में मि. एस.एस. केरी ने किया था.

दक्षिण-पूर्व रेलवे के अन्तर्गत बिलासपुर रेलवे से 1890 में जुड़ा तथा विलासपुर कटनी लाइन 1891 में बनने से जंक्शन 1891 में बना. यहाँ नगरपालिका की स्थापना 1887 में हुई तथा नगर निगम 1981 में बना, यहाँ नाट्य थियेटर 1927 में बना, जो आज श्याम टाकीज है. नगर में पहला महाविद्यालय शिव भगवान् रामेश्वरलाल (एस.बी.आर.) 1944 में महाकोशल शिक्षण द्वारा स्थापित किया गया.

दर्शनीय स्थल

शहर के दर्शनीय स्थलों में कानन पेण्डारी (वन्य प्राणी संरक्षण गृह एवं उद्यान विवेकानंद उद्यान), श्री दीनदयाल उपाध्याय स्मृति वन (व्यापार विहार), श्री अयप्पा स्वामी मन्दिर (तिफरा), काली मंदिर (तिफरा) आदि हैं.

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